आम सूचना :- भारतीय रेलवे माल गोदाम श्रमिक संघ के नाम पर कुछ लोग आम लोगों को अनावश्यक प्रलोभन (जैसे- फर्जी - रेलवे पास इत्यादि) देने का प्रयत्न कर रहे है। इससे सावधान रहें।
भारत सरकार का सबसे बड़ा और अति महत्त्वपूर्ण राजस्व स्त्रोत भारतीय रेल मंत्रालय है। भारतीय रेलवे आमदनी का मुख्य स्त्रोत यात्री किराया और माल भाड़ा है। अनुमानत: रेलवे को 1 रूपये में 29 पैसे यात्री किराए से औार 63 पैसे माल भाड़े तथा 8 पैसे अन्य मद से मिलता है। माल भाड़े से इतनी अच्छी आमदनी के बावजूद भारत सरकार रेलवे ट्रैक या कारखाने के तहत कार्यरत श्रमिको को उचित सुविधाए नहीं दे रही है। भारतीय रेलवे मालगोदामो में आज भी श्रमिक बंधुआ मजदूर की तरह काम करते देखे जा रहे है। अपनी बिगड़ती दशा को सुधारने और भूखमरी से बचने के लिए करीब दो दशक पूर्व मालगोदामो के श्रमिको ने अखिल भारतीय स्तर पर भारतीय रेलवे माल गोदाम श्रमिक संघ की स्थापना की जिसके द्वारा भारत सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकृष्ट कराया जा सके। भारतीय रेलवे माल गोदाम श्र​मिक संघ का र​जिस्ट्रेशन 1998 ई0 में हुआ। ​जिसका र​जिस्ट्रेशन न0 3768 हैं। इसके संस्थापक व माल गोदाम में काम करने वाले श्र​मिकों के अ​धिकार के बारे में सोचने वाले पहले  व्य​क्ति श्री अरूण कुमार पासवान हैं। इन सब के बावजूद भारत सरकार और रेल मंत्रालय इन श्रमिको के साथ टालमटोल की नीती अपनाती आ रही है। माल गोदाम श्रमिक संघ को मुख्य उद्वेश्य भारतीय रेलवे मालगोदामो मं कार्यरत श्रमिको की बदत्तर स्थिति को सुधारना है जिसके लिए संघ ने भारत सरकार और रेल मंत्रालय के समक्ष कुछ मांगे रखी है। मुख्य मांगें:-
» भारतीय रेलवे माल गोदाम में काम करने वाले श्रमिकों की सेवा स्थाई करना।
» 28 Oct 2003 की त्रिपक्षीय बैठक (श्रम मंत्रालय, रेल मंत्रालय एवं श्रमिक संघ) मे स्वीकृत मांगों को तत्काल लागु    ​किया जाए।
» रेलवे माल गोदाम श्रमिकों को प​रिचय पत्र, रेलवे पास व ​चिकित्सा सु​विधा दी जाए।
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